आरबीआई के सख्त रुख, रुपये की कमजोरी से 800 अंक टूटा सेंसेक्स

आईएएनएस, मुंबई

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के रुख में बदलाव और रुपये में आई कमजोरी से घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को फिर भारी गिरावट दर्ज की गई और प्रमुख शेयर सूचकांक दो फीसदी से ज्यादा लुढ़क गए। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल के दाम में दोबारा आई तेजी से भी बाजार में नकारात्मक रुझान पैदा हुआ।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के 50 शेयरों का सूचकांक निफ्टी पिछले सत्र के मुकाबले 282.80 अंक यानी 2.67 फीसदी लुढ़क कर 10,316.45 पर बंद हुआ।

वहीं, बंबई स्टॉक एक्सचेंज के 30 शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स 792.17 अंक यानी 2.25 फीसदी लुढ़क कर 34,376.99 पर बंद हुआ।

महज तीन कारोबारी सत्र में सेंसेक्स में 2,000 अंक से ज्यादा की गिरावट आई है। वहीं निफ्टी 650 अंक से अधिक लुढ़का है।

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसिस के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर ने कहा, "ब्याज दर को यथावत रखने का आरबीआई का फैसला चौंकाने वाला था, क्योंकि महंगाई बढ़ रही है।"

उन्होंने कहा, "रुपये में गिरावट और बढ़ गई, जिससे शेयर सूचकांकों ने गोते लगाए, क्योंकि आगे राजकोषीय घाटा बढ़ने का खतरा बना हुआ है।"

रुपया डॉलर के मुकाबले 19 पैसे की कमजोरी के बाद 73.77 पर बंद हुआ, मगर करोबार के दौरान रुपये में रिकॉर्ड 74.22 तक की गिरावट दर्ज की गई।

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 3,370.14 करोड़ रुपये की बिकवाली की। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों की लिवाली 1,902.07 करोड़ रुपये की रही।

सेंसेक्स में सबसे ज्यादा लुढ़कने वाले शेयरों में ओएनजीसी (15.93 फीसदी), रिलायंस इंडस्ट्रीज (6.31 फीसदी), भारतीय स्टेट बैंक (4.73 फीसदी), अदाणी पोर्ट्स (4.40फीसदी) और भारतीय एयरटेल (4.27 फीसदी) शामिल हैं।

सेंसेक्स में बढ़त बनाने वाले प्रमुख प्रशेयरों में इन्फोसिस (2.19 फीसदी), टाटा कंसल्टेंसी (1.88 फीसदी), इंड्सइंड बैंक (1.36फीसदी), एचडीएफसी बैंक (0.10 फीसदी) शामिल हैं।

आरबीआई ने अपनी पूर्व छह मौद्रिक नीति समीक्षा में जो तटस्थ रुख कायम रखा था, उससे इतर मौद्रिक समीक्षा बैठक में सख्त रवैया अपनाने का फैसला किया।

वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी मौद्रिक समीक्षा की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो रेट 6.5 फीसदी पर बरकरार रखने का फैसला किया है।