आक्रामक कांग्रेस

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कांग्रेस ने राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में जनाक्रोश रैली बुलाकर नरेन्द्र मोदी सरकार के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष का बिगुल फूंकने की कोशिश की है। राहुल के अध्यक्ष बनने के बाद यह सरकार के खिलाफ पहली राष्ट्रीय रैली थी। जाहिर है, इसके पीछे पार्टी ने पूरी शक्ति लगाई। हालांकि अव्यवस्था के कारण कार्यकर्ता मैदान के बाहर भटकते रहे और अंदर कुर्सयिां खाली पड़ी रहीं, जिनका संदेश अच्छा नहीं गया।

किंतु मंच से अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अन्य नेताओं ने जो कुछ कहा, उन सबको मिलाकर देखें तो ज्यादातर बातें वही थीं, जो मोदी सरकार के विरु द्ध कांग्रेस के नेता कहते आ रहे हैं। यानी सरकार के खिलाफ नोटबंदी, जीएसटी, राफेल सौदा, सांप्रदायिकता, अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव, आरएसएस के लोगों का संस्थाओं में प्रवेश का आरोप..जैसे मुद्दे ही अभी से 2019 के चुनाव तक रहने वाले हैं। प्रश्न है कि क्या ये मुद्दे और इनके माध्यम से लगाए गए आरोपों में इतनी ताकत है कि लोग मोदी सरकार एवं भाजपा के खिलाफ उद्वेलित होकर कांग्रेस के पक्ष में आ जाएं?

जनाक्रोश रैली के माध्यम से कांग्रेस नेतृत्व ने दो कोशिश की। एक, मोदी सरकार को विफल बताना और अपने नेताओं-कार्यकर्ताओं-समर्थकों में यह विश्वास पैदा करना कि हम आने वाले समय में राज्य विधानसभा चुनावों से लेकर अगला लोक सभा चुनाव भी जीतने जा रहे हैं। लगातार चुनाव हारती पार्टी के लिए इस तरह का विश्वास पैदा करना बहुत जरूरी है।

निराशा के आलम में नेता और कार्यकर्ता भी मन से काम नहीं करते और जो वोट मिलने वाला होता है, वह भी नहीं मिल पाता। इसके विपरीत यदि विश्वास एवं उत्साह का माहौल हो तो स्थिति पलट जाती है। इस नाते देखें तो राहुल एवं उनके सलाहकारों की रणनीति ठीक कही जा सकती है। किंतु फिर यह प्रश्न खड़ा होता है कि क्या राहुल ने विजय का जो भरोसा दिलाने की कोशिश की; नेताओं-कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उसे उसी रूप में ग्रहण किया?

एक रैली के भाषण से किसी पार्टी में नीचे से ऊपर तक छाई निराशा खत्म नहीं हो सकती। इसके लिए बड़ी रैलियों से लेकर निचले स्तर तक लगातार कार्यक्रम करने और सरकार के विरु द्ध संघष्रात्मक आंदोलनों के साथ कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की जरूरत होती है। कांग्रेस की सफलता-विफलता इसी बात पर निर्भर करेगी कि वह ऐसे आयोजनों का लक्षित श्रृंखला चलाने में सक्षम हो पाती है या नहीं?