अस्वीकार्य व्यवहार

,

ब्रिटिश एटरवेज ने दो भारतीयों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया वह बिल्कुल अस्वीकार्य है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नागर विमानन मंत्री सुरेश प्रभु से शिकायती पत्र में जो कुछ कहा है, उससे न केवल मन द्रवित होता है बल्कि गुस्सा भी पैदा होता है। तीन साल का बच्चा रो रहा हो तो माता-पिता उसे चुप कराने की कोशिश करेंगे। इसमें ऐसा क्या अस्वाभाविक हो गया, जिससे विमान के कर्मचारी ने अन्यथा ले लिया? दरअसल, बच्चे की सीट अलग हो जाने से वह अकेले रोने लगा तो मां ने अपने साथ बिठा लिया। बावजूद वह रोता रहा।

विमान कर्मचारी ने धमकी दी कि यदि यह चुप नहीं हुआ तो आपको उतार देंगे बल्कि ऐसा ही किया। आगे बढ़ चुके विमान को वापस रनवे पर लाया गया और इन्हें उतार दिया गया। इनके साथ एक अन्य भारतीय अधिकारी के परिवार को भी इसलिए उतार दिया गया, क्योंकि उन्होंने अपने रोते बच्चे को शांत कराने के लिए एक बिस्कुट दे दिया था। क्या विमान के उस कर्मी के अंदर भारतीय को लेकर कोई नस्लवादी भावना थी? सामान्य मनोभाव वाला कोई भी कर्मचारी इस तरह का बुरा बर्ताव नहीं कर सकता। उसने पुलिस तक को बुला लिया और पुलिस ने भी इन दोनों परिवारों की एक न सुनी।

धक्के देकर इन्हें जबरन विमान से बाहर किया गया और बोर्डिग पास तक छीना गया। खैर, जैसा सुरेश प्रभु ने कहा है सरकार के स्तर पर यह मसला उठाया गया है। मामला ब्रिटिश एयरवेज के प्रबंधन तक पहुंच चुका है। किंतु इसे यूं ही नहीं जाने दिया जा सकता। यह देश की प्रतिष्ठा का सवाल है। भारत के एक भी निर्दोष, निरपराध नागरिक को कहीं अपमानित किया जाता है, उसे उसके अधिकारों से वंचित किया जाता है, परेशान किया जाता है तो यह उस व्यक्ति का नहीं देश का मसला हो जाता है। भारत ऐसा कमजोर देश भी नहीं, जिसके नागरिकों के साथ र्दुव्‍यवहार किया जा सके।

भारत की छवि केवल अपने लिए नहीं विश्व समुदाय के हर एक व्यक्ति की गरिमा की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले देश की रही है। यह तो हमारे नागरिक का प्रश्न है। इसलिए ब्रिटिश एयरवेज को हर्जाना देने से लेकर, सार्वजनिक क्षमा याचना और संबंधित कर्मचारी को दंडित करने के लिए विवश किया जाना चाहिए ताकि फिर कोई किसी भारतीय को अपमानित और उत्पीड़ित करने का दुस्साहस न करे।