अस्पतालों पर नजर

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अस्पतालों में मरीजों के इलाज की कोई मॉनिटरिंग प्रणाली यदि विकसित हो तो उसका निस्संदेह स्वागत किया जाएगा। अभी तक अस्पताल में मरीज भर्ती होते हैं और उनका जो भी इलाज डॉक्टर करते हैं, वह अस्पताल तक ही सीमित रहता है।

उस पर कहीं एक केन्द्रीय प्रणाली से नजर रखी जाए तथा वहां से भी अस्पतालों को आवश्यकता पड़ने पर मार्ग निर्देश मिले इसका सुझाव विशेषज्ञ लंबे समय से दे रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस संदर्भ में जल्द ही आउटपुट बेस्ड मॉनिटिरंग सिस्टम (पोर्टल) बनाने की जो घोषणा की है, उसे पहली नजर में उचित कहा जाएगा।

इसके लिए मंत्रालय एनएबीएच के साथ मिलकर एक पोर्टल बनाने की दिशा में काम कर रहा है जिससे विभिन्न अस्पतालों में मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की गुणवत्ता पर रियल टाइम नजर रहेगी। इससे देश के सभी अस्पतालों को जोड़े जाने की योजना है। इस पोर्टल के जरिए सभी अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों, उनका इलाज, ऑपरेशन, उसे किस डॉक्टर ने अंजाम दिया, मरीज के आईसीयू व वेंटीलेटर पर रहने की अवधि के साथ इलाज के दौरान मरने वालों तक की रियल टाइम मॉनिटिरंग की जाएगी।

ऐसा हो जाए इसमें दूरस्थ मरीजों के बारे में वहां के डॉक्टर विशेषज्ञों से सुझाव लेकर उनका बेहतर इलाज कर सकते हैं। इसके और भी कई लाभ हो सकते हैं। मसलन, अस्पताल की कमियों की ओर ध्यान जाएगा जिसे दूर किया जा सकता है। लेकिन सवाल तो यही है कि क्या वाकई इतना बड़ा तंत्र विकसित हो पाएगा जहां से वाकई इतनी पैनी नजर रखी जा सके? यह काम आसान नहीं है। देश के सभी अस्पतालों को जोड़कर लाखों की संख्या में मरीजों के इलाज एवं उनकी स्थिति पर नजर रखने की स्थिति यों ही निर्मिंत नहीं हो सकती। भारत में अभी इंटरनेट की स्थिति को देखते हुए शायद सारे अस्पतालों को जोड़ना संभव नहीं हो।

हालांकि कहा जा सकता है कि जितना भी होगा वह मरीजों के हक में ही होगा। हम न भूलें कि सरकार पहले से ही मेरा अस्पताल नाम का एप, पोर्टल और एसएमएस प्रणाली विकसित कर चुकी है। कहा जाता है कि अस्पताल से छुट्टी होने के साथ ही मरीजों से उनकी संतुष्टि आदि के संबंध में प्रश्न किए जाते हैं। पता नहीं कितने मरीजों से पूछा जाता है, कितने जवाब देते हैं। फिर उन जवाबों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं यह भी हमें नहीं पता।

सच तो यह कि इस प्रणाली की जानकारी भी अभी तक सभी को नहीं है। इसका भी योजनानुसार क्रियान्वयन करने के लिए अभी काफी काम करने की जरूरत है।