अमीर भारत

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भारत विश्व का छठा सबसे धनी देश बन गया है। अफ्रो-एशिया बैंक वैश्विक संपत्ति पलायन समीक्षा रिपार्ट के अनुसार भारत की कुल संपत्ति 8230 अरब डॉलर की है। इस रिपोर्ट को सच मान लें तो 2027 तक भारत, ब्रिटेन और जर्मनी को पछाड़ विश्व का चौथा सबसे धनी देश बन जाएगा। भारत की संपत्ति का मतलब भारतीयों की संपत्ति ही है।

रखिए कि रिपोर्ट तैयार करते समय किसी देश के हर व्यक्ति की कुल निजी संपत्ति को आधार माना गया है। प्रश्न स्वाभाविक है कि आखिर, भारत की संपत्ति में इतनी तेजी से  वृद्धि का कारण क्या है? जवाब इसी रिपोर्ट में है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में संपत्ति सृजन के कारणों में उद्यमियों की भारी संख्या, अच्छी शिक्षा प्रणाली, सूचना प्रौद्योगिकी का शानदार परिदृश्य, कारोबारी प्रक्रिया की आउटसोर्सिंग, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर और मीडिया क्षेत्र शामिल हैं यानी देश में विश्व स्तर के उद्यमी खड़े हो गए हैं, उसके अनुरूप कारगर शिक्षा व्यवस्था हमने विकसित कर ली है..सूचना प्रौद्योगिकी में तो दुनिया भारत का लोहा मानती ही है..स्वास्थ्य और मीडिया क्षेत्र भी संपत्ति सृजन के कारण बन रहे हैं।

रिपोर्ट का यह भी मतलब है कि संपत्ति सृजन के इन कारणों में आने वाले कई वर्षो में ह्रास होने की संभावना नहीं है। रिपोर्ट भारत के पिछड़ने या विकास न करने आदि आरोप को गलत साबित करती है। किंतु इसके दो पक्ष और हैं। रिपोर्ट में कृषि की चर्चा नहीं है। भारत से कृषि को निकाल दिया जाए तो करीब 56-57 प्रतिशत लोगों का जीविकोपार्जन ही खत्म हो जाता है।

इतनी संख्या में लोग जीविकोपार्जन के लिए कृषि पर निर्भर हैं, और वह संपत्ति सृजन का कारण नहीं है तो यकीनन गहरी चिंता का विषय है। दूसरे, भारत भले छठे नम्बर पर है, लेकिन प्रमुख देशों की संपत्तियों के मामले में काफी पीछे है। अमेरिका 62584 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ शीर्ष स्थान पर है।

24,803 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ चीन दूसरे और 19,522 अरब डॉलर के साथ जापान तीसरे स्थान पर है। रिपोर्ट में यह भी साफ है कि आने वाले दशक में चीन की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी एवं वर्ष 2027 तक यह बढ़कर 69,449 अरब डॉलर और अमेरिका की संपत्ति बढ़कर 75,101 अरब डॉलर हो जाएगी।

साफ है कि हम भले छठे या कुछ वर्ष बाद नौवें स्थान पर पहुंच जाएं इन देशों के सामने कमजोर ही रहने वाले हैं।