अब देवरिया कांड

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बिहार के मुजफ्फरपुर के बाद अब उत्तर प्रदेश के देवरिया के बालिका आश्रय गृह से आई सूचनाएं भी डराने वाली हैं। देवरिया में बालिकाओं को यौन व्यापार में संलिप्त कराने के साक्षात प्रमाण मिले हैं। हमारे समाज का कितना पतन हुआ है इसकी परख का इनसे बड़ा प्रमाण कुछ हो ही नहीं सकता।

जिन बालिकाओं को संरक्षण देकर आपको एक सुयोग्य, साहसी और स्वावलंबी बनाने की जिम्मेवारी थी, उनको पैसे के लिए देह व्यापार में संलिप्त होने को मजबूर कर दिया गया। इन घटनाओं के सामने आने का मतलब है कि बालिका संरक्षण गृह के नाम भी अन्यत्र ऐसे ही हमारी बच्चियों का दैहिक शोषण हो रहा होगा।

इससे सबक लेकर देश भर में चलने वाली ऐसी संरक्षण गृहों की त्वरित जांच कराई जानी चाहिए। ऐसा केवल इन दो संस्थाओं तक सीमित नहीं हो सकता। कोई राज्य सरकार इससे चूकती है, या इसे टालती है, तो वह भी उतना ही बड़ा अपराधी मानी जाएगी जितना लड़कियों से देह व्यापार कराने वाले। केंद्र को भी इसे संज्ञान में लेकर राज्यों को तुरंत एडवायजरी जारी करना चाहिए।

बिहार सरकार ने मुजफ्फरपुर कांड के बाद यह निर्णय किया है कि बालिका संरक्षण गृहों को अब एनजीओ के हाथों से ले लिया जाएगा। सरकार स्वयं इनका संचालन करेगी। तात्कालिक रूप से यह निदान लग सकता है, क्योंकि सरकारी तंत्र में किसी एक व्यक्ति का नियंत्रण बालिका गृह पर नहीं हो सकता। इससे लड़कियों को यौन शोषण किए जाने की संभावनाएं कम होंगी।

किंतु जरूरी नहीं कि सरकार कर्मचारी नैतिक और सदाचारी ही हो। सरकारी संस्थाओं में भ्रष्टाचार और कदाचार कोई छिपा तथ्य नहीं है। इसलिए इससे आगे भी विचार किए जाने की आवश्यकता है। चाहे बालिका गृह का संचालन एनजीओ करें या सरकार, यह सुनिश्चित करना होगा कि जो नियम-कानून हैं, उनका पालन हो। संबंधित पूरे तंत्र की व्यापक समीक्षा एवं उसमें आवश्यक बदलाव की जरूरत है।

अच्छा तो यही होगा कि केंद्र इस मामले पर सभी राज्य सरकारों की बैठक भी आयोजित करे। इसमें सभी राज्यों की बालिका गृहों की समीक्षा के बाद भविष्य के लिए कुछ ऐसे कदमों की घोषणा हो जिससे इस तरह के जघन्य अपराध की संभावनाएं नि:शेष हो जाएं। ये घटनाएं राष्ट्रीय शर्म का विषय हैं, और इनको इसी रूप में लिया जाना चाहिए।