अफ्रीकी देशों से संबंधों को प्राथमिकता भारत की नीति

भाषा, मलाबो

अफ्रीका के सभी मित्र-राष्ट्रों को प्राथमिकता दिए जाने को भारत सरकार की नीति बताते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि इक्वेटोरियल गिनी के साथ भारत के संबंधों में एक नए दौर की शुरुआत हो रही है और हम इस देश में कौशल-विकास और ‘क्षमता निर्माण’ में सहायता करने को प्रतिबद्ध हैं।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने रविवार को यहां इक्वेटोरियल गिनी में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए कहा, भारत के राष्ट्रपति की इस सुंदर देश की यह पहली यात्रा है। इक्वेटोरियल गिनी के साथ भारत के संबंधों में एक नए दौर की शुरुआत से जुड़ना मेरे लिए बहुत खुशी की बात है। इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति के साथ मेरी अच्छी और उपयोगी बातचीत हुई। उन्होंने कहा, हम दोनों इस बात पर सहमत हुए कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और इक्वेटोरियल गिनी के संबंधों में जो गहराई आई है उसे और शक्ति प्रदान करनी है ताकि हमारे आपसी संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकें।

राष्ट्रपति ने कहा, इक्वेटोरियल गिनी समेत अफ्रीका के सभी मित्र-राष्ट्रों को प्राथमिकता देना भारत सरकार की नीति है। अफ्रीका की यह उनकी तीसरी यात्रा है। इस यात्रा के दौरान वह यहां से ज़ाम्बिया और स्वाज़ीलैंड भी जाएंगे।

कोविंद ने कहा, भारत और इक्वेटोरियल गिनी, दोनों ही उपनिवेश रहे हैं और संघर्ष करके आज़ाद हुए हैं। दोनों के बीच परस्पर सीखने की बहुत संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा, मुझे बहुत आशा है कि मेरी इक्वेटोरियल गिनी की इस यात्रा से हमारे द्विपक्षीय रिश्तों में नए आयाम जुड़ेंगे और हमारे संबंधों में बढ़ोतरी होती रहेगी। दोनों देशों के बीच संबंधों को प्रगाढ़ बनाने पर जोर देते हुए रामनाथ कोविंद ने कहा, भारत वि में सबसे तेजी से बढ़ रही बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक है। यह जानकारी आप सब के लिए महत्वपूर्ण है, और उपयोगी भी है। आप सबको चाहिए कि आप तेजी से हो रहे इन बदलावों की जानकारी हासिल करते रहें। उन्होंने कहा, भारत और इक्वेटोरियल गिनी के बीच व्यापार और निवेश की बहुत संभावनाएं हैं और कृषि तथा लघु और मध्यम क्षेत्र के व्यापार में दोनों देश अपना योगदान दे सकते हैं।

इक्वेटोरियल गिनी के साथ रिश्तों को मजबूत बनाने की भारत सरकार की तत्परता को रेखांकित करते हुए कोविंद ने कहा, हम इक्वेटोरियल गिनी में कौशल-विकास और ‘क्षमता निर्माण’में सहायता करने के लिए वचनबद्ध हैं। भारत सरकार ने यहां एक ‘इंगलिश ट्रेनिंग लैबोरेटरी’ तथा एक ‘उद्यमिता विकास एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र’ खोलने का प्रस्ताव किया है।