अपराधियों का संयुक्त परिवार

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बिहार के मुजफ्फरपुर के एक बालिका आश्रय गृह ‘सेवा संकल्प’ में नाबालिग बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न की सचाई प्याज के छिलके की तरह परत दर परत खुल कर सामने आने लगी है। यह घृणित और जघन्य यौन व्यापार खुद बालिका गृह के कर्ता-धर्ता की घोर निंदनीय, अमानवीय व घृणित संलिप्तता में संबद्ध विभाग, पुलिस, प्रशासन, राजनीति और न्यायपालिका के दबंग और रसूखदार लोगों के आपसी गठजोड़ से चल रहा था। इन सबमें सर्वाधिक सालने वाली रही-नागरिक समाज की चुप्पी। यह मानने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए कि इस कथित अपराध का मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर एक मोहरा भर है।

तो यह है कि यह पूरी तरह सिस्टम का फेल्योर है। सिस्टम आपने आप में अच्छा या बुरा नहीं होता है। पुलिस, प्रशासन, राजनीति और न्यायपालिका में यदि अच्छे और ईमानदार लोग होंगे तो सिस्टम अच्छा होगा ही। अगर भ्रष्ट और बेईमान हुए तो बेशक सिस्टम खराब होगा। इन तकाजों पर इस घिनौने अपराध को परखा जाए तो निष्कर्ष यही होगा कि बिहार का सिस्टम पूरी तरह भ्रष्ट और बेईमान हो गया है।

मीडिया में कड़े प्रतिरोध व विपक्षी दलों के दबाव में ही सीबीआई जांच शुरू हो सकी। लेकिन विपक्षी दलों सहित अनेक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन पटना हाईकोर्ट की देखरेख में जांच पर अड़े हुए हैं। दरअसल, प्रथमदृष्टया इस घिनौने सामाजिक अपराध में सफेदपोश तबकों की जैसी बहुस्तरीय भागीदारी पाई गई है। यह तबका रसूखवाला है और इसकी पहुंच शीर्ष सत्ता तक है।

ऐसे में सीबीआई जांच अगर हाईकोर्ट की देखरेख में नहीं हुई तो इसका हश्र भी 1983 के चर्चित बॉबी हत्याकांड की तरह होगा, जिसमें तब के सत्ताधारी नेता और नौकरशाहों को बेदाग बचा लिया गया था। मुजफ्फरपुर का ताजा मामला तब सामने आया, जब मुंबई की संस्था ‘टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस’ ने अपनी रिपोर्ट में बच्चियों के यौन शोषण का जिक्र किया।

जांच में 42 में से 34 बालिकाओं के साथ बलात्कार की पुष्टि हुई। यह दो महीने पहले की बात है। लेकिन तिस पर भी समाज कल्याण विभाग की मेहरबानी देखिये कि संस्था के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के दिन ही इसे एक अन्य परियोजना की मंजूरी दे दी। फिर भी उम्मीद की जानी चाहिए कि सीबीआई अपना काम करेगी, सफेदपोश बेनकाब होंगे और सिस्टम साफ हो सकेगा।