अनुकरणीय कदम

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पाकिस्तान को क्रिकेट का वर्ल्ड कप दिलाने वाले इमरान खान प्रधानमंत्री के तौर पर कितना सफल पारी खेल पाते हैं, यह तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन शपथ ग्रहण करने के साथ ही उन्होंने सादगी की जो मिसाल पेश की है, वह अनुकरणीय है। सबसे पहले तो उन्होंने आलीशान महलनुमा प्रधानमंत्री निवास के बजाय तीन कमरे वाले एक सादे से मकान में रहने की घोषणा की।

इस प्रधानमंत्री निवास में कार्यरत पांच सौ से ज्यादा कर्मचरियों में से केवल दो को अपने पास रखा। और अब सरकारी फिजूलखर्ची रोकने के लिए उन्होंने राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, सीनेट अध्यक्ष और नेशनल असेंबली के स्पीकर की प्रथम श्रेणी हवाई यात्रा पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। वास्तव में उनके इस कदम से पाकिस्तान और भारत सहित एशिया और अफ्रीका के गरीब मुल्कों में राजसी ठाट-बाट से रहने वाले राजनीतिक नेताओं को सबक लेना चाहिए।

इन गरीब मुल्कों की आधी से ज्यादा आबादी गरीबी रेखा से नीचे अपना जीवन बसर करती है और बड़ी मुश्किल से दो जून की रोटी का जुगाड़ कर पाती है। लेकिन दूसरी ओर यहां के नेता और नौकरशाहों ने राजशाही ढंग से जीने की आदत डाल ली है। जाहिर है, यह राजसी-सामंती प्रवृत्ति लोकतंत्र पर गाली के समान है।

पाकिस्तान और भारत जैसे देशों की गरीब, अपढ़ और सामाजिक अंधविश्वासों में जकड़ी ज्यादातर आम जनता तो नेताओं के राजसी ठाट-बाट से प्रभावित हो जाती है। मगर पढ़ा-लिखा और प्रबुद्ध लोगों के मन में इनके प्रति शंकाएं और वितृष्णाएं पैदा होती हैं। यह सवाल स्वत: खड़ा होने लगता है कि एक साधारण राजनीतिक कार्यकर्ता एमएलए, सांसद और मंत्री बनते ही अपार चल-अचल संपत्ति का स्वामी कैसे बन जाता है?

अगर निष्पक्ष ढंग से जांच की जाए तो भारत में सैकड़ों नेता आय से अधिक संपत्ति रखने के जुर्म में दोषी पाए जाएंगे। जाहिर है अवैध ढंग से अर्जित की गई संपत्ति से समृद्धि आती है या सरकारी व्यवस्थाओं के दुरुपयोग से समृद्धि आती है।

बड़ा सवाल यह है कि भ्रष्टाचार मुक्त और कांग्रेस मुक्त नया भारत बनाने का संकल्प लेने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सत्ता और राजनीति में सादगी स्थापित करने की पहल करेंगे? प्रधानमंत्री इमरान खान के साहसिक फैसले पर भारतीय मीडिया की चुप्पी सालती है।