अंधविश्वास या..

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राजधानी दिल्ली के संतनगर बुराड़ी में एक साथ 11 लोगों की आत्महत्या शैली में मौत ने पूरे देश को हिला दिया है। 10 शव लटका और एक फर्श पर पड़ा मिला है। यह ऐसा वाकया है, जिसके बारे में पुलिस के लिए किसी नतीजे पर पहुंचना कठिन हो गया है। सभी के चेहरे और मुंह एक ही चादर के भाग से ढके होने का रहस्य समझ से परे है। परिवार के सात मोबाइल और एक टैब साइलेंट मोड में घर में स्थित मंदिर के पास रखे मिले हैं। घर से बरामद डायरी और नोटों में रहस्यमय धार्मिंक अनुष्ठानों की बात है। एक नोट्स में कहा गया है कि कोई मरेगा नहीं, बल्कि महान होगा।

इन सबसे पहला निष्कर्ष यही निकलता है कि शायद किसी धार्मिंक मान्यता के अनुसार आपस में विमर्श कर पूरे परिवार ने एक साथ आत्महत्या की। अगर ऐसा है तो यह विचार करना पड़ेगा कि आखिर ऐसा कौन सा संप्रदाय एवं पंथ है, जो लोगों को इस सीमा तक जीवन त्यागने के लिए प्रेरित कर सकते हैं? पश्चिमी देशों में डूम्सडेज संप्रदायों का चलन 1990 तथा उसके पूर्व के दशक में देखा गया था। किसी बाबा के आश्रमनुमा घरों में रहने वाले सभी के एक साथ मौत के मुंह में चले जाने की कई घटनाएं उस दौरान सामने आई थीं।

हमारे यहां हिन्दू धर्म और इनसे निकले अधिकतर पंथों में मोक्ष को जीवन का चरम लक्ष्य अवश्य कहा गया है, पर आत्महत्या को पाप की श्रेणी में रखा गया है। आप मोक्ष के लिए साधना करिये जो स्वाभाविक मृत्यु के साथ प्राप्त हो सकता है। मृतकों के परिवार के बारे में पड़ोसियों का कहना है कि ये लोग अत्यंत ही दयालु एवं धार्मिंक प्रवृत्ति के थे। यह परिवार लोगों की मदद करने में हमेशा आगे रहता था। नोटबंदी के वक्त भी इन्होंने आसपास के लोगों की मदद की थी। अपनी परचून की दूकान पर ये सिगरेट, बीड़ी, गुटखा आदि नहीं बेचते थे। उनकी दूकान पर प्रतिदिन कोई न कोई धार्मिंक वाक्य लिखा जाता था।

इस तरह परिवार में व्याप्त धार्मिंकता का प्रमाण तो मिल जाता है। किंतु ऐसे लोग क्यों एक साथ अपनी जान देने के लिए तैयार होंगे इसका स्पष्ट उत्तर तलाश किया जाना चाहिए। यदि बुराड़ी की घटना वाकई किसी धार्मिंक अनुष्ठान से प्रेरित हैं तो यह अत्यंत चिंताजनक है। यह विचार एक परिवार तक सीमित नहीं हो सकता। ऐेसा विचार दूसरी जगह भी होंगे। इसलिए इसके पीछे के मस्तिष्क को खोजना बेहद आवश्यक है। अगर ऐसा नहीं है तो फिर आम अपराध के तरीके से इसकी छानबीन होनी चाहिए ताकि सही कारणों का पता चले।