यूपी में निशाने पर विपक्ष
स्कूलों में निशुल्क पढ़ाई की व्यवस्था करवाई जा रही है। इसके लिए डबल इंजन सरकार पैसा उपलब्ध करवा रही है। उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानमंडल के बजट सत्र के छठे दिन विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर यह कहा।
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विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है, हर बच्चा योग्यता के अनुसार आगे बढ़े और राष्ट्र के विकास में योगदान करे। हर बच्चे को हम उत्तम शिक्षा देने को कृतसंकल्प हैं जिससे वे मजहबी शिक्षा तक न सीमित रहें, बल्कि हम उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और साहित्यकार बनाने का अवसर प्रदान कर रहे हैं। योगी ने समाजवादी पार्टी के पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक मॉडल पर सवाल दागते हुए इसे महज ढोंग ठहराया।
महाकुंभ को लेकर विपक्षी दलों की छींटाकशी और दुष्प्रचार पर उन्होंने कहा कि सपा सदस्यों का आचरण उपहास, विरोध और अंत में स्वीकृति के माध्यम से उजागर हो गया। गंगा जल की शुद्धता को लेकर उठाए गए सवालों पर पलटवार करते हुए योगी ने इसे अल्कलाइन वाटर जितना शुद्ध बताया। अल्कलाइन पानी में महत्त्वपूर्ण खनिज संभावित लाभों के मद्देनजर मिले होते हैं।
हालांकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिबूनल को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा था कि गंगा-यमुना के पानी में तय मानकों से कई गुना ज्यादा फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया है जो स्नान तो क्या आचमन के योग्य भी नहीं है। परंतु इसको गंभीरता से लेने की बजाय कुतकरे द्वारा खारिज करने में राज्य सरकार समेत पूरा महकमा जुट गया है।
इसमें कोई संदेह नहीं कि मुख्य विपक्षी दल होने के नाते सपा योगी सरकार को लगातार निशाने पर रखती है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव विभिन्न मौकों पर सोशल मीडिया के जरिए योगी पर आरोपों की बौछार करने से चूकते नहीं। नामालूम कारणों से धन्यवाद भाषण में योगी अधिकतर इन्हीं आरोपों पर व्यंग्य बाण छोड़ते नजर आए। राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान हुए शोर-शराबे और टिप्पणियों को उन्होंने असंवैधानिक बताया। जो सही भी है।
जनता द्वारा चुने गए नुमाइंदों को अपनी बात रखने के लिए भाषाई मर्यादा और व्यवहार में लचीलापन रखना चाहिए। देखने में आया है कि विभिन्न विधानसभाओं ही नहीं संसद में भी विपक्ष का रवैया असंसदीय होता जा रहा है।
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